कल दिल्ली से अप्रवासी बिहारी श्रमवीरों की ट्रेन मुज़फ़्फ़रपुर के लिए रवाना हुई। मीडिया में खबरें आयी कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने सभी बिहारी यात्रियों का किराया अदा किया क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार बिहार सरकार समय पर टिकटों के किराए को लेकर ना ही कोई संतुष्टदायक जवाब दे सकीं और ना ही निर्णय लें सकी। इसलिए मानवता के नाते दिल्ली सरकार ने सारा खर्चा वहन करने का निर्णय लिया।

निसंदेह यह बिहार सरकार के लिए शर्मसार करने वाली घटना है। कोरोना काल में संवेदनहीन बिहार सरकार के कारण बिहारी अस्मिता को लगातार चोट पहुँच रही है। हमने एक ज़िम्मेवार विपक्ष के नाते त्वरित यह निर्णय लिया कि बिहार सरकार की असमर्थता के चलते हम अपने राज्यवासियों को ऐसे नहीं छोड़ सकते इसलिए हमारे वादे अनुसार हम 50 ट्रेनों का किराया देने के लिए एकदम तैयार है। हम शुरू से कह रहे है कि नीतीश सरकार की अप्रवासी मज़दूर भाईयों को वापस बुलाने की कोई मंशा और योजना नहीं है। विपक्ष और जनदबाव में ख़ानापूर्ति करने के लिए ये प्रतिदिन गिनी-चुनी ट्रेन चलाने की औपचारिकता मात्र निभा रहे है ताकि लोग विरोध प्रकट ना कर सकें।

अगर वास्तव में बिहार सरकार अप्रवासी भाईयों को वापस बुलाना चाहती है तो फिर उनका किराया पहले देने में क्या आपत्ति है? यह बाद में लौटने का क्या तर्क? अधिकांश अप्रवासी भाई ऐसे है उनके पास खाने के पैसे नहीं है, किराए के कहाँ से आएँगे? अधिकारी लोग मुख्यमंत्री को भ्रमित कर रहे है। मैंने विधानसभा की सर्वदलीय बैठक में भी मुख्यमंत्री के समक्ष यह मामला उठाया था।

हमने दिल्ली सरकार को धन्यवाद देने के साथ-साथ दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री से विनम्र आग्रह किया है कि वो दिल्ली सरकार के खाते में किराया राशि ट्रांसफ़र कराने की प्रक्रिया बताने का कष्ट करें। क्योंकि सामूहिक प्रयास, सकारात्मक सहयोग, सक्रिय शैली और इच्छा शक्ति से ही हम सभी ग़रीब श्रमवीरों की मदद कर सकते है।। (तेजस्वी यादव)

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